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चहलुम पे उमड़ी करबला में श्रद्धालुओं की भीड़।*

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*चहलुम पे उमड़ी करबला में श्रद्धालुओं की भीड़।*

 

धीरज गुप्ता की रिपोर्ट गया बिहार

गया में हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चालीसवें के मौके पर गया करबला में भारी तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी लोग सुबह से ही फातेहा और चादरपोशी के लिए जमा हुए इसी दौरान 3 बजे दिन में शिया हज़रात अलम लेकर करबला में हाज़िर हुए और हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में नौहा ख्वानी वा जंजीरी मातम कर के अपने अक़ीदतो मोहब्बत का नज़राना पेश किया और ये मातम शिया मस्जिद से निकल कर तुतबाड़ी, पंचायतीया अखाड़ा होते हुए 3 बजे दिन में करबला पहुँचा और यहीं आखिरी रसोमात अंजाम पाया है जैसा के मालूम है कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत को तक़रीबन 1300 से ज्यादा साल हो चुके हैं लेकिन आज भी और रहती दुनिया तक करबला का वाक़या याद किया जाएगा और उनके अक़ीदतमन्द और उनसे मोहब्बत करने वाले अपने-अपने तरीके से खेराज अक़ीदत पेश करते रहेंगे एवं बाद नमाज़े ऐशा करबला रौज़े के अंदर सुन्नी वा हिन्दू समुदाय के लोग चादरपोशी वा सलातो सलाम का नज़राना पेश करते है इस मौके पर ख्वातीनो हज़रात काफी तादाद में तक़रीबन रात के 11 बजे तक रहते है  इस मौके पर करबला को फूलों से सजाया गया।जनअधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  वा पूर्व सांसद पप्पू यादव करबला पहुंच कर चादर्पोशी की वा दुआएं मांगी,करबला के खादिम हज़रत सयैद शाह शफी आलम क़ादरी वारसी के बड़े साहबजादे डॉ सयैद शब्बीर आलम साहब ने बताया कि ये हिंदुस्तान में वाहिद ऐसा करबला है जहाँ शिया,सुन्नी,हिन्दू व तमाम मज़हब के लोग एकजुट होकर हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत को याद करते हैं और इस चहलुम के मौके पर अपने अपने तरीके से मोहब्बत का नज़राना पेश करते हैं शिया हज़रात नौहा ख्वानी और मातम करते है तो सुन्नी हज़रात नात वा मनकबत और चादर पोशी करते है और नादरगंज से भी लोग काफी तादाद में आकर यहां सलातो सलाम का नज़राना पेश करते है वहीं हिन्दू भाई इत्र फूल वा अगरबत्ती जला कर ईमाम हुसैन और करबला की मैदान में शहीद हुए उनके मानने वालो को याद करते है और साथ ही साथ भाई चारगी और मोहब्बत का पैगाम देते हैं दुनिया  के सभी धर्म ने अहिंसा का दरस दिया है लेकिन अगर कोई मानव धर्म की आड़ में हिंसा फैलता है तो वो अधर्मी है ना कि धार्मिक । आज ज़रूरत इस बात की है के हज़रत इमाम हुसैन और गौतम बुद्ध के रास्तों पर चल कर पूरी दुनिया में अमन वा मोहब्बत का पैगाम फैलाया जाए। उन्होंने कहा की गया करबला एक ऐसी जगह है जहाँ मोहर्रम वा चहलुम पर अनेक धर्म के लोग एक होकर इमाम हुसैन को याद करते हैं यह गंगा जमुनी तहजीब की ज़िंदा मिसाल है।

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